Thursday, December 18, 2025
Muktibodh: Quantum mechanics और भारतीय दर्शन
स्वाधीनता के साथ स्वतन्त्रता
पिछले दिनों दिल्ली में एक बड़े संगठन के अखिल भारतीय अधिकारी ने चर्चा के दौरान बताया कि भारतीय पौराणिक इतिहास में दैत्यों ने विभिन्न वरदान प्राप्त करके खुद को बिल्कुल अपराजेय सा बना लिया था । जैसे रक्तबीज के रक्त की एक बूंद पृथ्वी पर गिरते ही असंख्य रक्तबीज पैदा हो जाते थे, हिरण्यकश्यप को ना कोई दिन में मार सकता था ना रात में, ना आकाश में ना पाताल में, ना घर के अंदर ना बाहर इत्यादि, दशानन रावण की नाभि में अमृतकुंड था जिसके खत्म होने के बाद ही उसकी मृत्यु संभव थी । इसी प्रकार अन्य दैत्य जैसे मधु कैटभ, भस्मासुर, शुम्भ निशुम्भ आदि को भी ऐसे ही कुछ वरदान प्राप्त हुए । किंतु भगवान ने भिन्न भिन्न रूप लेकर उनके वरदान की गरिमा का ध्यान रखते हुए उसी के बीच से कोई ना कोई रास्ता निकाला और उन सभी का वध किया । आज के परिप्रेक्ष्य में देखें तो एक समाज के तौर पर हम भी अनगिनत दैत्यों का सामना हर रोज कर रहे हैं जैसे भ्रष्टाचार, जातिवाद का ज़हर, व्यभिचार, आर्थिक शोषण, आतंकवाद, जमाखोरी, टैक्स चोरी आदि आदि । ऐसा प्रतीत होता है कि इनका कोई हल नहीं हो सकता किंतु कभी तो कोई ना कोई मार्ग अवश्य मिलेगा इनसे मुक्ति का । शायद तब हम कह सकेंगे कि अब स्वाधीनता के साथ स्वतंत्रता भी प्राप्त हो गयी है । प्रयास कीजिये उस मार्ग को ढूंढने का।
सभी को 79वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं ।।
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Quantum mechanics और भारतीय दर्शन
Quantum mechanics और भारतीय दर्शन दोनों हमें यह सिखाते हैं कि संसार जैसा हमें दिखाई देता है, वह अंतिम सत्य नहीं है। *quantum level पर वास्तविकता संभावनाओं का खेल है,* जबकि वेदांत में यह *माया* का परिणाम है। दोनों ही दृष्टिकोण यह संकेत करते हैं कि अंतिम सत्य एक गहरे स्तर पर छिपा हुआ है—क्वांटम में *wavefunction* के रूप में और वेदांत में *ब्रह्म* के रूप में। जब इस wavefunction का अवलोकन करते हैं तो निश्चित अवस्था में यह collapse कर जाता है, भारतीय दर्शन में यह *आत्मज्ञान* की स्थिति है जब माया का आवरण हट जाता है और बस ब्रह्म शेष रहता है ।
ब्रह्म सत्य, जगत मिथ्या ।।
कर्म और भाग्य
05/12/25
कल मिथुन चक्रवर्ती का एक पुराना इंटरव्यू देखा । 30-35 साल पुराना युवा मिथुन का इंटरव्यू जब वे अपने कैरियर के शिखर पर थे । वे कह रहे थे कि ये नसीब ही है जो आपको बनाता है और नसीब ही है जो गिराता है । विधाता ने जो लिख दिया है उसे कोई नहीं बदल सकता हम बस हाथ पैर मार सकते हैं । नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी अभी हाल के एक पॉडकास्ट में अमूमन यही दोहरा रहे थे कि इंसान की हैसियत कीड़े मकोड़ों से ज्यादा नहीं है फिर 'purpose of life' जैसे शब्दों का कोई महत्व नहीं है । आपको ईश्वर का कृतज्ञ होना चाहिए कि उसने ये समय आपको दे दिया और करीब करीब यही विराट कोहली ने भी वर्ल्ड कप जीतने के बाद कहा कि हम बस कोशिश कर सकते हैं, देना ना देना ऊपरवाले के हाथ है ।
अपने जीवन में सर्वस्व पाने के बाद भी इस प्रकार का समर्पण आपको जड़ों से जोड़े रखता है । ये भाग्यवादी होना नहीं है, कर्म तो हर हाल में करना ही है किंतु फल क्या होगा वो हमारे हाथ में नहीं है । ये सब कुछ कहना आसान है किंतु इसे स्वीकार करना बड़ा मुश्किल है । जबसे हम इस सच को स्वीकार करने लगते हैं तब से जीवन की सार्थकता और उसके अनुभव की गहराई बढ़ती जाती है ।
हरि कृपा ही केवलम ।।
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निरंकुश होती रफ़्तार...
18/12/25
कल रात नोएडा आगरा यमुना एक्सप्रेसवे पर बेलगाम रफ़्तार ने अपना रुद्र रूप दिखलाया है । कोहरे में रफ्तार से भागती दौड़तीं 11 गाड़ियां आपस में बुरी तरह से टकराईं जिससे आग लग गयी और करीब 13 लोग जिंदा जलकर काल के गाल में समा गए और करीब 40 लोग घायल हुए । इससे पहले अक्टूबर में एक डबल डेकर बस पलट गई थी जिसमें भी बहुत घायल हुए । एक्सप्रेसवे आदि पर कोई अपनी रफ़्तार को कम नहीं करना चाहता, सबको जल्दी है किसी खास गंतव्य तक पहुंचने की । इस तरह का desperation सिर्फ गाड़ियों की रफ़्तार तक ही सीमित नहीं है । आप अपने आसपास नज़र दौड़ाएंगे तो आपको हैरानी होगी कि छोटे बच्चे या बड़े भी अब लम्बे वीडियो नहीं देख सकते उन्हें रील देखने की आदत हो चुकी है जहां वे कुछ सेकण्ड्स से ज्यादा रुक नहीं रहे, वो इस कश्मकश में हैं कि जल्दी से जल्दी बहुत सारी रील्स देख लीं जाएं । ये भी एक किस्म की बेलगाम रफ़्तार ही तो है । विश्विविद्यालयों में किसी को फेल नहीं किया जा रहा क्योंकि एक साल रुक कर दोबारा पढ़ने का धैर्य इस तेजी से बढ़ती दुनिया में बहुत हताशा से भरा है, सो विद्यार्थियों के लिए "री एग्जाम" , "ऑन डिमांड एग्जाम" या फिर "मर्सी एग्जाम" जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं जिसे वे कुछ अतिरिक्त"धन" देकर प्राप्त कर सकते हैं। कथित विकास की इस दौड़ में विद्यार्थी फेल होकर भी पास होते जा रहे हैं और शिक्षा के उद्देश्य पास होकर भी फेल होते जा रहे हैं । विद्यार्थी रफ़्तार के साथ एक के बाद एक डिग्रीयां तो हासिल कर रहे हैं किंतु वैचारिक, आध्यात्मिक और कौशल विकास के स्तर पर शून्य ही बने रहते हैं । रफ़्तार की ये कहानी विश्वविद्यालयों तक भी सीमित नहीं है, पारिवारिक और सामाजिक टूट भी इसके उदाहरण हैं । हर रोज़ तलाक़ के बढ़ते केसेस, फैमिली कोर्ट्स की बढ़ती संख्या या फिर पार्टनर को छोड़कर जल्द से जल्द "move on" करने की प्रवृत्ति क्या ये सब भी रफ़्तार से नहीं हो रहा ।
चाहे विज्ञान हो, अध्यात्म हो या रोजमर्रा का जीवन, सम्भवतः हर जगह जीवन का उदगम, और पोषण अंधकार, एकांत और धीमी चलने वाली प्रक्रियाओं में ही होता है । यही धीमी प्रक्रियाएं विज्ञान में "rate determining step" होतीं हैं, आध्यात्म में ध्यान और रोजाना की जीवनशैली में इसी को patience मान लेंगे ।
अतः रुकिए, संभलिए, फिर चलिए ।।
धन्यवाद🙏
Muktibodh: Quantum mechanics और भारतीय दर्शन
Muktibodh: Quantum mechanics और भारतीय दर्शन : Quantum mechanics और भारतीय दर्शन दोनों हमें यह सिखाते हैं कि संसार जैसा हमें दिखाई देता है, ...
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18/12/25 कल रात नोएडा आगरा यमुना एक्सप्रेसवे पर बेलगाम रफ़्तार ने अपना रुद्र रूप दिखलाया है । कोहरे में रफ्तार से भागती दौड़तीं 11 गाड़ियां आपस...
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Quantum mechanics और भारतीय दर्शन दोनों हमें यह सिखाते हैं कि संसार जैसा हमें दिखाई देता है, वह अंतिम सत्य नहीं है। *quantum level पर वास्तव...
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