18/12/25
कल रात नोएडा आगरा यमुना एक्सप्रेसवे पर बेलगाम रफ़्तार ने अपना रुद्र रूप दिखलाया है । कोहरे में रफ्तार से भागती दौड़तीं 11 गाड़ियां आपस में बुरी तरह से टकराईं जिससे आग लग गयी और करीब 13 लोग जिंदा जलकर काल के गाल में समा गए और करीब 40 लोग घायल हुए । इससे पहले अक्टूबर में एक डबल डेकर बस पलट गई थी जिसमें भी बहुत घायल हुए । एक्सप्रेसवे आदि पर कोई अपनी रफ़्तार को कम नहीं करना चाहता, सबको जल्दी है किसी खास गंतव्य तक पहुंचने की । इस तरह का desperation सिर्फ गाड़ियों की रफ़्तार तक ही सीमित नहीं है । आप अपने आसपास नज़र दौड़ाएंगे तो आपको हैरानी होगी कि छोटे बच्चे या बड़े भी अब लम्बे वीडियो नहीं देख सकते उन्हें रील देखने की आदत हो चुकी है जहां वे कुछ सेकण्ड्स से ज्यादा रुक नहीं रहे, वो इस कश्मकश में हैं कि जल्दी से जल्दी बहुत सारी रील्स देख लीं जाएं । ये भी एक किस्म की बेलगाम रफ़्तार ही तो है । विश्विविद्यालयों में किसी को फेल नहीं किया जा रहा क्योंकि एक साल रुक कर दोबारा पढ़ने का धैर्य इस तेजी से बढ़ती दुनिया में बहुत हताशा से भरा है, सो विद्यार्थियों के लिए "री एग्जाम" , "ऑन डिमांड एग्जाम" या फिर "मर्सी एग्जाम" जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं जिसे वे कुछ अतिरिक्त"धन" देकर प्राप्त कर सकते हैं। कथित विकास की इस दौड़ में विद्यार्थी फेल होकर भी पास होते जा रहे हैं और शिक्षा के उद्देश्य पास होकर भी फेल होते जा रहे हैं । विद्यार्थी रफ़्तार के साथ एक के बाद एक डिग्रीयां तो हासिल कर रहे हैं किंतु वैचारिक, आध्यात्मिक और कौशल विकास के स्तर पर शून्य ही बने रहते हैं । रफ़्तार की ये कहानी विश्वविद्यालयों तक भी सीमित नहीं है, पारिवारिक और सामाजिक टूट भी इसके उदाहरण हैं । हर रोज़ तलाक़ के बढ़ते केसेस, फैमिली कोर्ट्स की बढ़ती संख्या या फिर पार्टनर को छोड़कर जल्द से जल्द "move on" करने की प्रवृत्ति क्या ये सब भी रफ़्तार से नहीं हो रहा ।
चाहे विज्ञान हो, अध्यात्म हो या रोजमर्रा का जीवन, सम्भवतः हर जगह जीवन का उदगम, और पोषण अंधकार, एकांत और धीमी चलने वाली प्रक्रियाओं में ही होता है । यही धीमी प्रक्रियाएं विज्ञान में "rate determining step" होतीं हैं, आध्यात्म में ध्यान और रोजाना की जीवनशैली में इसी को patience मान लेंगे ।
अतः रुकिए, संभलिए, फिर चलिए ।।
धन्यवाद🙏
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