05/12/25
कल मिथुन चक्रवर्ती का एक पुराना इंटरव्यू देखा । 30-35 साल पुराना युवा मिथुन का इंटरव्यू जब वे अपने कैरियर के शिखर पर थे । वे कह रहे थे कि ये नसीब ही है जो आपको बनाता है और नसीब ही है जो गिराता है । विधाता ने जो लिख दिया है उसे कोई नहीं बदल सकता हम बस हाथ पैर मार सकते हैं । नवाजुद्दीन सिद्दीकी भी अभी हाल के एक पॉडकास्ट में अमूमन यही दोहरा रहे थे कि इंसान की हैसियत कीड़े मकोड़ों से ज्यादा नहीं है फिर 'purpose of life' जैसे शब्दों का कोई महत्व नहीं है । आपको ईश्वर का कृतज्ञ होना चाहिए कि उसने ये समय आपको दे दिया और करीब करीब यही विराट कोहली ने भी वर्ल्ड कप जीतने के बाद कहा कि हम बस कोशिश कर सकते हैं, देना ना देना ऊपरवाले के हाथ है ।
अपने जीवन में सर्वस्व पाने के बाद भी इस प्रकार का समर्पण आपको जड़ों से जोड़े रखता है । ये भाग्यवादी होना नहीं है, कर्म तो हर हाल में करना ही है किंतु फल क्या होगा वो हमारे हाथ में नहीं है । ये सब कुछ कहना आसान है किंतु इसे स्वीकार करना बड़ा मुश्किल है । जबसे हम इस सच को स्वीकार करने लगते हैं तब से जीवन की सार्थकता और उसके अनुभव की गहराई बढ़ती जाती है ।
हरि कृपा ही केवलम ।।
🙏
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